मैं हमेशा अपनी नीड़ में ही मिलूंगाकभी ढूंढना हो भीड़ में नहीं मिलूंगाचलता है सच जहां उस मैखाने में मिलूंगापाखण्ड हो पंडितों का जहां वहां नहीं मिलूंगा!!!*शब्दाशं*
मैं हमेशा अपनी नीड़ में ही मिलूंगाकभी ढूंढना हो भीड़ में नहीं मिलूंगाचलता है सच जहां उस मैखाने में मिलूंगापाखण्ड हो पंडितों का जहां वहां नहीं मिलूंगा!!!
*शब्दाशं*