तुम रूठे हो मैं मना नहीं सकतामेरी कोशिश बिल्कुल चांद के माफिक हैंचांद कितना भी चमक लेरात को दिन बना नहीं सकता ¡¡¡*शब्दांश*
तुम रूठे हो मैं मना नहीं सकतामेरी कोशिश बिल्कुल चांद के माफिक हैंचांद कितना भी चमक लेरात को दिन बना नहीं सकता ¡¡¡
*शब्दांश*