गले कटेंगे ,रक्त बहेगा ,खून की ये धरती होगी ।।
भूमी हमारी ना छोड़ी तो डूबी तेरी कश्ती होगी ।
अगर ना है समझ तो ना समझ ,तू ही तो भुगतेगा ।।
तू रोयेगा ,अफसोस करेगा ,और भारत भारत गूंजेगा ।
गूंज सुन फिर भी ना भागा तो कब तक तू थैरेगा ।।
है यकीन हम सबको की ,तिरंगा वहाँ भी फैरेगा ।


