इस सृष्टि में आग लगी ,बरसा फिर सालों तक जल 


आग बुझी फिर धुआं उठा ,फिर होगा ये सब कल ।


काले बादल ,गूंजी बिजली, बरसों बरस चला ये सब 


बाढ़ आई , फिर धरती डूबी ,विशाल समुंदर बना ये तब।


वायु बनी ,जीवन पनपा,फिर धीरे धीरे विस्तार हुआ 


बनी मछली , फिर मगरमच्छ फिर जा कर कहीं इंसान बना ।


फिर इंसान ने बनाया सब कुछ और किया सिर्फ खुद पर गर्व ,


आग लगेगी फिर बुझेगी , फिर होगा ये सब कल ।