घर में तेरा बचपन बीता ,घर में तुझे सुकून मिला ।।

यूँ तो दर दर भटका ,ठोकर खाई फिर जाके ये वजूद मिला ।


करी तपस्या तूने काफी ,फिर घमंडी क्यों बनता है ।।

मकान बने होंगे तप से ,पर घर बचपन से ही बनता है ।