Poetry 1 min read 328.7K reads

दगाबाजी


मेरे ख़ासुलख़ास लोगों के नाम में तू भी शामिल था।दौर-ए- गर्दिश तू साथ होगा यकीन-ए-कामिल था।

जिस पर हौले से बैठता रहा रस चूस कर उड़ गया।यार तितली है तू पर फूल नहीं था वो मेरा दिल था।

Read more Earn more Learn more