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काश तुमने एक बार मुड़ के देखा होता

काश तुमने एक बार मुड़ के देखा होता उन आंसुओं को जो गिर के भी टूटे नहीं उन होंठों को जो सिले थे अपनी ही जुबान से उन लफ़्ज़ों को जो बोलने से पहले ही दफ़न हो गए उन आँखों को जो पलकें नहीं झपकाती और उस दिल को जो धड़कना भूल गया हो काश तुमने एक बार मुड़ के देखा होता आंसुओं से जमी बर्फ में दफ़न ज़िंदा लाश को साँसों की गर्मी से झुलसी आहों को पत्थर हुई आँखों से बहते हुए खून को
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