क्या तुमने देखी हैं कभी आंसुओं से बहती सुबह कभी काटा है होंठो को अपने दाँतों से कभी नाखूनों से दीवार पे किसी का नाम लिखा है कभी मन हुआ है जोर से रोने का पर आवाज़ जैसे गले में दब गयी हो कभी पैरों के नाखूनों से जमीं को कुरेदा है कभी कड़वे लगे हैं मीठे कौर कभी आईने पे जमी धूल पे उँगलियों से किसी का नाम लिखा है कभी खोये हो किसी की यादों में इतना की वक़्त का पता न चला हो कभी ढूँढा है किसी को पुरानी किताबों के पन्नों में कभी किसी के लिखे खतों के शब्दों पे उंगलियां फिरायीं हैं कभी गुज़ारा है कोई दिन एक ही जगह शून्य में निहारते हुए कभी किसी को इतना याद किया है की आंसुओं की जगह लहू निकला हो और क्या कभी हाथ फैला के खुदा से अपने लिए मौत मांगी है अगर ये सब न किया तो तुम क्या जानो मोहब्बत क्या होती है दर्द क्या होता है.......