Poetry 1 min read 784.7K reads

सदा


सदाएं हमने दी थी कई,तुमने जाने सुना नहीं,

या जाने मुड़े नहीं,इंतजार तुम्हारा अब,

लम्हे लम्हे से,अरसा अरसा हो गया है ...

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