तेरे जुल्म की इन्तेहा लिख रहा हूँ !

तुझे आज से बेवफा लिख रहा हूँ !! 

 

हया लिख रहा हूँ, अदा लिख रहा हूँ !

तेरे हुस्न को आइना लिख रहा हूँ !! 

 

मिले हैं मुझे गम मुहब्बत में जितने !

उन्हें मै वफ़ा का सिला लिख रहा हूँ !!

 

हथेली पे जब भी लिखू नाम तेरा !

लगे जैसे कोई दुआ लिख रहा हूँ !!

 

हरिक लफ्ज में जिक्र आता है तेरा !

भले कोई मिसरा नया लिख रहा हूँ !!

 

भले नाखुदा है सितमगर है जालिम !

मगर फिर भी उसको खुदा लिख रहा हूँ !!

 

लिफाफे में रख कर ये दिल अपना साहिल !

मै ऊपर तुम्हारा पता लिख रहा हूँ !!