कोयल सा चहकना सीखो...

गुलाब सा महकना सीखो...

गर तुम्हें तलब है किसी नशे की तो ..

इश्क़ के नशे में बहकना सीखो..


कमल सा खिलना सीखो...

मोम सा पिघलना सीखो...

गर है आरजू किसी में मिलने की तो...

किसी बुझी राख़ से खाक में मिलना सीखो....


नदी सा मुड़ना सीखो...

पतंग सा उड़ना सीखो....

गर हो जुड़ना साथ किसी के तो..

अपनी मिट्टी से जुड़ना सीखो...


सूरज से चढ़ना सीखो...

बेल से बढ़ना सीखो....

गर हो हसरत दिल में कुछ पाने की..

तो पानी सा किनारो से लड़ना सीखो...