उस जहान में तुमसे मुलाक़ात होगी ...


जहां बिछड़ने का रिवाज़ नहीं है ..

 दिल में छिपा कोई राज़ नहीं है ...

जहां टूटे दिल की कोई आवाज़ नहीं है.. 

हमें दूर करने वाला ये समाज नहीं है ..


जहां जज़्बातों की कमी नहीं है ...

आँखों में हरपल नमी नहीं है ..

जहां मज़हब और जाति की ज़मीं नहीं है ..

उस जहान में तुमसे मुलाक़ात होगी ...


जहाँ शक और शिकवे की गुंजाईश नहीं है .

हर रोज़ रिश्तों की आज़माइश नहीं है ..

जहाँ प्रेम के सिवा कोई ख्वाहिश नहीं है ..

एहसासों की कोई नुमाइश नहीं है ...

उस जहान में तुमसे मुलाक़ात होगी....


जहाँ मोहब्बत जिस्मानी नहीं है...

इश्क़ का नाम सिर्फ जवानी नहीं है..

जहाँ रूह वाली मोहब्बत पुरानी नहीं है....

जहाँ लोगों के मन में बेमानी नहीं है

उस जहान में तुमसे मुलाक़ात होगी..