पिछले दिनों अक्सर खुद को खोते देखा है,


जिन्दगी के हर मोड़ पर खुद को बदलते देखा है,


कभी खुशी में, कभी मजबूरियों में खुद को ढलते देखा है, 


कभी जो बन्दिशे लगती थी बोझ सी,


आज उन्हे याद कर के खुद को खोते देखा है


सोचो तो डर सा लगता है, इनमें हमने कई लोगों को खो जाते देखा है,


बचपन, जो पहचान हुआ करता था, हाथ से छूटते देखा है,


उम्र से पहले खुद को जिम्मेदारीया उठाते देखा है


कई रूप हैं मेरे, कई शख्सियत खुद में समाई है 


हमने तो इनकी लकीरों को खोते देखा है,


पिछले दिनों अक्सर खुद को खोते देखा है