क्या नाम दूं इस दीवानगी को
दिल की बैचैनी अब तड़पाने लगी है
क्या कहूं इस दीवानगी को जो अब पल-पल आपको बुलाने लगी है।
क्या कहूं इस दिल की लगी को जो आपके बिना इसे चैन नहीं है।
दिल उदास है कुछ इस कदर कि दिल की बैचेनी बहुत सताने लगी है
आ जाओ इक बार बस अब दिल की धड़कन भी यही कहने लगी है।
