अश्कों का फ़साना


कभी सबके सामने मत रोया करो

फिर ये अश्क़ अपना नही होता

बाज़ार में इसका सौदा होता है

फिर ये अपना सपना नही होता

भले ही इससे मन का बोझ कम होता है

किसी का मुनाफा भी मोटा होता है

बचा के रखो ये आँसू तब के लिए

पता चले जब, की सिक्का अपना ही खोटा है।।


- Arhaan Siddiqui