हर पल हर पल, पल पल पैरों तले चुभते काँटों से विष समान , जीभी डंको से  दांतो तले दबे शब्दों से है कसक है कसक , ये कैसी
घनघोर अँधेरा मन मस्तिष्क में छाया सम्पूर्ण मस्तिष्क निःशव्द हुआ है कसक , है कसक , ये कैसी अन्धकारस्त , ये जहाँ हो चला मन मस्तिष्क , बेचैन हर पल हो चला अन्तः अन्धकारस्त भविष्य , अंध कर चला लड़ती मरती , इस पल जीती साहस भर्ती इस पल है कसक है कसक , ये कैसी न कोई आमत्य , न कोई सेनाध्यक्ष न कोई सेना , न कोई हथियार युद्ध , ख़ुद से करू सुबहो - शाम करुक्षेत्र , जंग लडू सालो साल है कसक है कसक , ये कैसी