घनघोर अँधेरा
मन मस्तिष्क में छाया
सम्पूर्ण मस्तिष्क
निःशव्द हुआ
है कसक ,
है कसक , ये कैसी
अन्धकारस्त , ये जहाँ हो चला
मन मस्तिष्क , बेचैन
हर पल हो चला
अन्तः अन्धकारस्त
भविष्य , अंध कर चला
लड़ती मरती , इस पल
जीती साहस भर्ती इस पल
है कसक
है कसक , ये कैसी
न कोई आमत्य , न कोई सेनाध्यक्ष
न कोई सेना , न कोई हथियार
युद्ध , ख़ुद से करू
सुबहो - शाम
करुक्षेत्र , जंग लडू
सालो साल
है कसक
है कसक , ये कैसी
