बीते कुछ दिन थे बहुत खास
थी उन दिनों में जीने मरने की आस
ज़िन्दगी ने हमे दिखाए थे ऐसे पल
न सोचा था कभी, कल आज कल
जहा जा सकती थी गई वही
वो किया जिसे सबने बोला सही
न थी किसी चीज़ की मुझे ललक
और वो चाहते थे मेरे मुस्कुराहट की एक झलक
वो दिन और पल न भूल पाएंगे
क्योकि वो यादें फूल न बन पाएंगे।
उम्मीद की किरण करती थी हर बार निराश
दिल यही कहता, न होती मैं यहाँ काश
पर करती भी क्या जब यही ज़िन्दगी ने लिखा है
कुछ ज़्यादा नहीं पर इतना सीखा है
जो भी हो, जैसा भी हो
पार करना हर किनारा है
क्योकि कल के बाद वाला आज
हर बार लाता एक सवेरा है।
पर फिर भी
वो दिन और पल न भूल पाएंगे
क्योकि वो यादें फूल न बन पाएंगे।


