
बांंध सके संंबंधों को जो
ऐसा कहाँ कोई बंधन है
बांधी जिसने पहली राखी
उस बहना का अभिनंदन है
रक्षा का यह मार्ग कठ
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बांंध सके संंबंधों को जो
ऐसा कहाँ कोई बंधन है
बांधी जिसने पहली राखी
उस बहना का अभिनंदन है
रक्षा का यह मार्ग कठ