बांंध सके संंबंधों को जो
ऐसा कहाँ कोई बंधन है
बांधी जिसने पहली राखी
उस बहना का अभिनंदन है
रक्षा का यह मार्ग कठिनतम
काँटों का जैसे उपवन है
रक्षा का दायित्व संभाले
हर भाई का अभिनंदन है !
©अर्चना आनंद भारती


बांंध सके संंबंधों को जो
ऐसा कहाँ कोई बंधन है
बांधी जिसने पहली राखी
उस बहना का अभिनंदन है
रक्षा का यह मार्ग कठिनतम
काँटों का जैसे उपवन है
रक्षा का दायित्व संभाले
हर भाई का अभिनंदन है !
©अर्चना आनंद भारती