आग सीने में छुपाए वो पहरों रोई हैराख़ यूँ ही तो नहीं राख़ हुई है जानां!मौलिक एवंं अप्रकाशितअर्चना आनंद भारती
आग सीने में छुपाए वो पहरों रोई हैराख़ यूँ ही तो नहीं राख़ हुई है जानां!
मौलिक एवंं अप्रकाशितअर्चना आनंद भारती