जैसे प्रवाल भित्तियों सेफिर - फिर टकराएकोई लहर और लौट जाएपर करती रहे वह प्रयास निरंतरकि लिख सके एक शिलालेखवह सागर के हृदय परमैं चल रहा हूँ ठीक वैसेप्रेम के पथ पर©अर्चना आनंद भारती
जैसे प्रवाल भित्तियों सेफिर - फिर टकराएकोई लहर और लौट जाएपर करती रहे वह प्रयास निरंतरकि लिख सके एक शिलालेखवह सागर के हृदय परमैं चल रहा हूँ ठीक वैसेप्रेम के पथ पर
©अर्चना आनंद भारती