1 min read 791.5K reads

मरम्मत


मैं हर उदासी पर लिख डालता हूँ एक पंक्तिदिन ,हफ़्तों ,महीनों मैं जोड़ता हूँ उनके टुकड़ेबना लेता हूँ इन पंक्तियों से कविताएँइस तरह मैं अपनी रूह कीमरम्मत कर लेता हूँ !

©अर्चना आनंद भारती

Read more Earn more Learn more