मैं हर उदासी पर लिख डालता हूँ एक पंक्तिदिन ,हफ़्तों ,महीनों मैं जोड़ता हूँ उनके टुकड़ेबना लेता हूँ इन पंक्तियों से कविताएँइस तरह मैं अपनी रूह कीमरम्मत कर लेता हूँ !©अर्चना आनंद भारती
मैं हर उदासी पर लिख डालता हूँ एक पंक्तिदिन ,हफ़्तों ,महीनों मैं जोड़ता हूँ उनके टुकड़ेबना लेता हूँ इन पंक्तियों से कविताएँइस तरह मैं अपनी रूह कीमरम्मत कर लेता हूँ !
©अर्चना आनंद भारती