मुझे तलाश है...

मुझे तलाश है, ख़ुद की!

वो जो, कहीं खो गयी है,

ज़िन्दगी की दौड़ में!

वो जो कल बेपरवाह थी,

आज ग़ुम है,

अपनी पहचान, बनाने की होड़ में!

आँखों में सपनें, हज़ारों थे

हौसला भी था,

अरमान भी था!

तुम जब आये, जीवन में,

ऐसा लगा मानो...

अब नीड़ भी था, आसमान भी था!

"मैं" से "हम" हो गयी,

जब, तुम जीवन में आये!

सोचा, मिलकर साथ चलेंगे,

जैसे एक - दूजे के साये!

पर, नीड़ संवारने की चाह में,

"ख़ुद" के ही पर बांध आयी,

मैंने बहुत ढूंढा, "हम" में "ख़ुद" को,

पर "मैं" कहीं, नज़र ना आयी!

मुझे तलाश है, उस "मैं" की,

जो, मेरी वास्तविक पहचान थी,

वही था मेरा "आत्मसम्मान",

इस बात से मैं अनजान थी!!