चलो, हाथों में लेकर हाथ चलते हैं!

अकेले तो बहुत चल लिये,

अब चार कदम साथ - साथ चलते हैं!

मंज़िलें,अलग हुईं, तो क्या हुआ,

अगली मोड़ तक करते, अपनी बात चलते हैं!

दो पल का भी साथ तेरा,

मेरे ज़ेहन में, दिन- रात चलते हैं!

बादलों और आँखों,

दोनों में, बारिशों का मौसम हैं,

अपने साथ, दोनों के बरसात चलते हैं!

रोने दो, हाथों की लकीरों को,

आज किस्मत को, एक बार फिर देते हुए मात चलते हैं!

सिर्फ शरीर से ही तो, प्यार की पहचान नहीं,

दोनों, दिलों में बसाये,

प्यार की सौगात चलते हैं!

रास्ते, हो गए जुदा,

पर दिलों में, एक दूसरे की सलामती के,

ज़ज़्बात चलते हैं!