परिश्रम -राह मंजिल की ओर's image
97K

परिश्रम -राह मंजिल की ओर

जिस राह जाने से डरता था

आज उसी राह पर बैठा हूं।

जिस चिंगारी से डरता था

आज उसी की आग अपने सीने में दबाए बैठा हूं।

जिस रात के अंधेरे में डरता था

आज उसी की चांदनी में शैर पर निकला हूं।

जिस तूफ़ान से घबराता था

आज उसी तूफान अपनी उड़ान भर रहा हूं।

जिन सवालों से घबराता था

आज उन्ही का उत्तर खोज आगे बढ़ रहा हूं।

Tag: life और3 अन्य
Read More! Earn More! Learn More!