आराम फ़रमाए अरसा हो गया

वक्त गवाए अरसा हो गया

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यूँ लुत्फ़ लिए अरसा हो गया

नींद मुफ़्त लिए अरसा हो गया

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इत्मिनान से सोचे अरसा हो गया

तकिए को दबोचे अरसा हो गया

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पेड़ की छाँव में बैठे अरसा हो गया

खुद से खुद को कुछ कहते अरसा हो गया

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माँ से बात किए अरसा हो गया

पड़ोसी से मुलाक़ात किए अरसा हो गया

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गिटार बजाए अरसा हो गया

किशोर दा के गाने गाए अरसा हो गया

सच पूछो तो अच्छे से मन ही मन मुस्कुराए अरसा हो गया।

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(Poetry From Instagram Account)