- जहाँ शब्द मौन होते हैं…!
एक निरंतर आवाज़,
एक सतत गूँज—
भीतर, बाहर, चारों ओर।
सुनती हूँ—
पत्तों की धीमी सरसराहट,
हवा की मद्धम फुसफुसाहट,
किसी की आँखों में छिपे अनकहे जज़्बात—
हर ध्वनि, हर ठहराव, हर धड़कन
एक कहानी समेटे हुए होती है,
कहने के इंतज़ार में।
सब कुछ मुझसे कुछ कहता है।
और, मैं सुनती हूँ—
क्योंकि अभिव्यक्ति की शुरुआत,
गहराई से सुनने और महसूस करने से होती है।
