वो चाहती थी मिलना,सबसे एक साथ तो,
वह हो गई है भर्ती,अब अस्पताल में।
रोटी मिली न उसको,उसके मकान में,
लेकर के दूध,फल सब,आए अस्पताल में।
दुख उसको था बहुत पर,सुनता न था कोई,
दुख उसका पूछने सब,आए अस्पताल में।
यदि मिलने उससे जाते,सब उसके मकान में,
फिर आज ना वो होती,शायद अस्पताल में।
वह सोचती है शायद,खुशियां यहां बहुत हैं,
घर वह कभी न जाए,रहे अस्पताल में।
अपन तिवारी,हरदोई
