||कहमुक़री||चुपके से खिड़की पे आके,छिप छिप के वो मोहे ताके!!हिय पे डारे मोह का फँदा,ऐ सखि साजन? ना सखि चंदा!!©अनु उर्मिल 'अनुवाद'
||कहमुक़री||
चुपके से खिड़की पे आके,छिप छिप के वो मोहे ताके!!हिय पे डारे मोह का फँदा,ऐ सखि साजन? ना सखि चंदा!!
©अनु उर्मिल 'अनुवाद'