
यूं टकटकी लगाये आसमा मे क्या देखते हो,
तुम्हारी आंखे क्यो बोझील सी प्रतीत नही होती अब,
क्या है वहां जो तुम पाना चाहते हो,
क्या है वहां जिसे तुम छुना चाहते हो,
और क्या है वहां जिसे तुम महसूस करना चाहते हो ।
एक किरन जो तुम्हे तेज़ प्रदान कर सकती है
और तुम्हे जला भी सकती है,
वो हवा जो तुम्हे छुकर निकल भी सकती है
और तुम्हे विचलित भी कर सकती है,
वो बादल जिसकी गरज़ तुम्हे डरा भी सकती है,
और तुम्हे ठन्डक भी प्रदान कर सकती है।
ये सारे अवरोध उत्पन्न कर सकते है तुम्हारे लिये
अगर तुम इसे
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