यूं टकटकी लगाये आसमा मे क्या देखते हो, तुम्हारी आंखे क्यो बोझील सी प्रतीत नही होती अब, क्या है वहां जो तुम पाना चाहते हो, क्या है वहां जिसे तुम छुना चाहते हो, और क्या है वहां जिसे तुम महसूस करना चाहते हो ।   एक किरन जो तुम्हे तेज़ प्रदान कर सकती है और तुम्हे जला भी सकती है, वो हवा जो तुम्हे छुकर निकल भी सकती है और तुम्हे विचलित भी कर सकती है, वो बादल जिसकी गरज़ तुम्हे डरा भी सकती है, और तुम्हे ठन्डक भी प्रदान कर सकती है।   ये सारे अवरोध उत्पन्न कर सकते है तुम्हारे लिये अगर तुम इसे अवरोध समझना चाहो, ये सारे शक्ति प्रदान कर सकते है अगर तुम इसे हौसला समझना चाहो ।   निर्भर तुम पर है सब, तुम क्या समझना चाहते हो, तुम इन्हे किस तरह देखना चाहते हो, पंखो को फैलाकर आसमा मे उड़ना चाहते हो, या ज़मी पर टिककर, सपनो को दूर से देखना चाहते हो ।   तुम कर सकते हो, तुम उड़ सकते हो, बस इतना समझ लो, मंजिल खड़ी है तुम्हारे लिये, दरवाजे खुले है तुम्हारे लिये, तुम्हे जाना है, जाना है, जाना है वो जो सिर्फ तुम्हारी आंखे देखती है, तुम्हे वो पाना है, पाना है, पाना है ।