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आंखों का दरिया


बहुत दिनों से मैं अपना अपना न रहा हूंजिंदगी भी अपने सलीके में न रहा हूंहाथ में लेखनी साथ न ला रहा हूंआंखों से उन आंखों को दरिया कर रहा हूंयूॅं ही सुबह से शाम दरिया का सूरज रहा हूं

— अनुरुध्द कुमार
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