बहुत दिनों से मैं अपना अपना न रहा हूंजिंदगी भी अपने सलीके में न रहा हूंहाथ में लेखनी साथ न ला रहा हूंआंखों से उन आंखों को दरिया कर रहा हूंयूॅं ही सुबह से शाम दरिया का सूरज रहा हूं