कई ख़्वाब बिखर गए स्याह पन्नों पर

कुछ टूटे, कुछ पूरे, कुछ आधे-अधूरे

कुछ चुभते, कुछ चीखते, कुछ सन्न से, कुछ गुमसुम

यही ख़्वाब हैं सबके, जो दिखाई देते हैं,

बस अंदाज़-ए-बयां अलहदा है सबका।