नाम वे सारे जो कभी इस दीवार के भीतर रहे हों

या कभी सोचा जिसने भी कि ये दीवार ही न हो

सरहद के जैसे दुश्मन समझ जो कोई उस पार का हो

जो मेरी तरक्की से कभी जला हो, नाम वे सारे ही लिख दो.


जो इस पार से उस पार का जाने का सोचे

या उस पार से इस पार आने का भी सोचता हो

जो इसे दीवार न समझ, एक द्वार समझे

नाम मेरी दीवार पर वे सारे ही लिख दो.


खिड़कियों से देखने पर, चेहरे जो एक से दीखते हैं

उन सभी को मेरा सलाम कह दो, नाम उनसे पूछ कर सारे ही लिख दो

मुझे जो जाने बिना ही दुश्मनी कर के बैठे हैं

या मेरे शब्दों से यारी हो गई जिनकी, नाम वे सारे मेरी दीवार पर लिख दो.