बातचीत बातचीत का हुनर भी है ख़ास , नहीं मिलता यह सब के पास ।
बात से निकलती है बात , कभी कहानी कभी जज़्बात । दिन है लम्बा , छोटी सी रात । जुड़ती कड़ी से कड़ी , हाथ थामे हाथ । बातचीत का हुनर भी है ख़ास , नहीं मिलता यह सब के पास । उन की बात ख़त्म होने को नहीं आती , हम से अपनी कहीं नहीं जाती । बरसों पुरानी भी याद , हम को कल की भूल जाती । हमारा वक़्त नहीं गुज़रता , उन को वक़्त की कमी रह जाती । बातचीत का हुनर भी है ख़ास , नहीं मिलता यह सब के पास । तरकश में तीरों का ख़ज़ाना , हर बार सही है निशाना । हमारी ज़ुबान पर , अल्फ़ाज़ो का नहीं आना जाना । बहुत की कोशिश , हम को नहीं आता रूठो को मनाना । बातचीत का हुनर भी है ख़ास , नहीं मिलता यह सब के पास ।