बहुत दिन हुए, चलों आज जरा खुद को निहार लूं,
आज आईने में अपना रूप संवार लूं।
वो कह रहे थे आजकल बदला बदला हूं मैं,
चलों आज जरा खुद को खंगाल लूं।
एक मिनट..
आईने मे कोई और है।
ये वो नहीं जो मै कल था,
ये वो भी नहीं जो मै आज हूं।
कहा से आया ये? है क्या कोई बेहरूपिया?
या कोई ठग,डाकू,चोर है?
आईने में कोई और है।
'चेहरे पर खुद के नक़ाब पहने
मुझे बेहरूपिया कहते हो?
अपनी नाकामीया छिपाने के लिए
बहानो की चादर ताने क्या खूब सोते हों।
चट्टान सी प्रतिभा लिए
शिशे सा जिगर लिए बैठे हों।
खुद में ही तुम खुद नहीं,
और आईने पे रोते हो?
अंदर भी अंधेरा, बाहर भी अंधेरा,
मर चुका तुम्हारे अंदर कब का भोर हैं,
तभी आईने में कोई और है।'
"मेरे बारे मे मुझे ही बताता है,
आखिर तू है कौन जो खुद को इतना होसियार दिखाता है?"
'मै तेरा अंतरमन हूं
जिससे छुट गया तेरा कब का नाता है।
मैं तेरा हौसला, महत्वकांक्षाएं, जिज्ञासा हूं,
जिन्हें तूं पल पल दबाता है।
रोज एक ही लड़ाई पर निकलता है,
और रोज हार कर आता हैं,
फिर भी अगले दिन ही
बेमन वापस शस्त्र उठाता है।
छोड़ के खुद को पिछे कही,
लग गया तु भी होड़ में,
तभी आईने में कोई और है।'
"बाते तेरी सच है,
पर मै मजबुर हूं।"
'मजबुर नहीं,तु खुद से दूर है!
दुसरो को खुश करने को,
कर बैठा अपने सपने चूर है।
खुद को पहचानना है तो खुद में मगरूर रह!'
"तुने एय आईने आज आंखें खोल दी।
बाते कुछ अनमोल आज तुने बोल दीं।
आज से जिंदगी दुसरो की नहीं,
खुद की शर्तों पर जिऊंगा।
वादा रहा अग्ली बार मिलु तो ये न कहुंगा
की आईने में कोई और है।"


