चाहकर भी नींद जब
बसने को न हो आँखों में,
वादे सभी बस टूट कर
बिखरे चले जब रातों में,
घड़ी की सुइयों की आवाज़ बस
पड़ती रहें कानों में,
खून फिर भी रिसता रहे
जब तुम्हारी सांसों में,
ऐसी एक वीरानी रात
दम तोड़ना मत।
बस हारना मत।
वो कल आएगा ज़रूर।
आंखें मूंद तुम्हारे,
किसी और दुनिया में
तुम्हें ले जाएगा ज़रूर।
वो दुनिया जो
जागते-सोते
बैठते-उठते
काम-आराम करते
एक साए की तरह
साथ चलती है हर वक़्त।
आशाओं पर टिकी
वो दुनिया
जो एक अरसे से
तुमने ढाल रखी है,
रंग लाएगा ज़रूर।
वो कल आएगा ज़रूर।
सुनो, वो तुम्हारे हिस्से की धूप
दरवाजे पे दस्तक दे रही है।


