तेरी यादें सारी बचकाना

हंसना रोना तेरा बचकाना

गुस्से से लाल कभी होकर

बस चुप कर जाना बचकाना


तेरी पढ़ती पढ़ती आंखों का

थककर झुक जाना बचकाना

खुद ही खुद में यूं गुम रहकर

सब से कट जाना बचकाना


जान बूझ कर कभी तेरा

बनकर इतराना बचकाना

कभी छोटी-मोटी बातों पर

सब से भिड़ जाना बचकाना


साथ रहकर, अलग रहे हम

अब दूर होकर भी एक से हैं

तब पता कहां था राहों में

टकराएगा तेरा बचकाना


वैसे आजाद पंछी हो तुम

पूरा आकाश है तेरा ठिकाना

पर परिभाषित करने को ही

नाम दिया तुम्हें है बचकाना


आवारा बुलाओ या कि आशिक़

कवि कह लो चाहे पागल ही

बस इतना ही चाहूंगा तुझसे

ज़िन्दा रखना तेरा बचकाना