जो चल रहा है

उसे चलते रहने देना

प्रकृति का सबसे बड़ा विरोध है ,

जो कुछ हो चुका है

या हो रहा है

उसे छोड़ कर

जो कुछ भी होने वाला है

उसमें हस्तक्षेप करना

जीवित होने का बोध है ।


सृजन अचानक से नहीं फूटता

कोई भी क्रम यों ही नहीं टूटता

ये सही निर्णयों का

जो सही समय पर

लिए नहीं गये

उनका प्रतिशोध है ,

किसी नये का आना

उसका प्रासंगिक हो जाना

ये पुरानी जड़ता का

सबसे बड़ा अवरोध है ,

वो अवरोध ,जो बता रहा है

जीवित रहने का प्रतीक

केवल सांस लेना नहीं है

जो बता रहा है

कि प्रगति का प्रतीक

केवल परिणाम देना नहीं है

हमेशा नयी लीक का बनते रहना

नयी विधा का बुनते रहना

संसार के स्थायित्व के लिए

सबसे जरूरी कर्तव्य है।


- अनूप सिंह