
जो चल रहा है
उसे चलते रहने देना
प्रकृति का सबसे बड़ा विरोध है ,
जो कुछ हो चुका है
या हो रहा है
उसे छोड़ कर
जो कुछ भी होने वाला है
उसमें हस्तक्षेप करना
जीवित होने का बोध है ।
सृजन अचानक से नहीं फूटता
कोई भी क्रम यों ही नहीं टूटता
ये सही निर्णयों का
जो सही समय पर
लिए नहीं गये
उनका प्रतिशोध है ,
किसी नये
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