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काबिल


है दिल की सरहदों में प्यार का किलाशामिल,नफ़रतों से जंग जीतकर किया हासिल,है तमन्ना कि द्वेष के दुर्ग को मैं नष्ट करूँ,और स्नेह बाँटने के मैं बनूँ काबिल |

— अनूप कृष्वाण
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