संघर्ष बिना भी जीवन है क्या ? 

कष्ट बिना भी आनंद है क्या ?

वह जीवन ही सुखमय नहीं,

जिसमें कांटों का वन नहीं,

संघर्ष भी अमृत बने, 

यदि स्वाद हो नया-नया |

संघर्ष बिना भी जीवन है क्या ?

जिस जीवन में संघर्ष नहीं, 

वो जीवन बड़ा ही आम है ।

लक्ष्य मेरा अंजाम हैं, जीवन मेरा संग्राम है ।

क्या एक सा रुकना सही ?

जिस जीवन में कुछ नया नहीं !

यदि सोच मेरी संकीर्ण बने ,

दूरी केवल कदम तीन बने ,

ये विश्व नहीं देख पाऊ मै,

यदि लक्ष्य मेरा भी हीन बने।

क्या विश्वजीत बन पाऊं मैं ?

यदि स्वयं को जीत ना पाऊं मैं ?

जीवन भी सम्राट बने ,

यदि चाणक्य भी मुझे मिले ।

जिस जीवन का महान लक्ष्य नहीं,

वह जीवन नहीं, नाकाम है।

लक्ष्य मेरा अंजाम है, जीवन मेरा संग्राम है ।

पथ में केवल फूल मिले हो ,

कंकड़ पत्थर घाम नहीं !

वह जीवन ही सिमटा हुआ, 

उसका शीला पर भी नाम नहीं ।

यदि जीवन केवल गृहस्थ आम होता ?

तो क्या सुभाष, शिवा, संग्राम होता ।

जीवन भी महान बने, यदि आदर्श प्रभु श्रीराम है।

लक्ष्य मेरा अंजाम है, जीवन मेरा संग्राम है

#घाम = पसीना