ना ये मुलाकात होती ना हम रूबरू होते।

ना ये प्यार के किस्से हमारे शुरू होते।

पहले अकेले थे फिर भी तन्हा नही थे होते।

हर वक्त रहते थे यारों की महफिल और हंसी से घिरे होते।

अब भीड मे भी क्यो अहसास है तुम बिन हम अकेले होने का।

काश कोई कह देता प्यार दर्द का सौदा है।

ना हम ये सौदा करते ना गम के ये अंधेरे होते।

कहने को यु मुलाकात तो रोज होती है तुमसे।

पर जब तक बात ना हो मुलाकात अधुरी है तुमसे।

रोज तेरी खिडकी को देखा करते है एक उम्मीद से।

तु दिख जाती एक बार और मुलाकात पुरी होती है तुमसे।

लब खामोश है मेरे अब बस ये निगाहें मिलती रहती है।

और बिना शब्द की माला, जैसे होती है बात कोई खास तुमसे।