शीर्षक ः- ठिठुरन
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दस्तक हुई दिसम्बर की सर्दी का मौसम आया है।
साल का ये महीना एक प्यारी सी ठिठुरन लाया है।
उम्र दराज अब छुप गये बन्द कमरो मे कम्बल में।
दर्द भरे दिन को उनके थोडा इस ठिठुरन ने भी बढाया है।
बच्चो के लिये तो ये मौसम बस मस्ती ले कर आया है।
हर बच्चे ने कही ना कही अपना घुमने का प्लान बनाया है।
कुछ बात करे अब जवानी की ऐसा आलाम आया है।
हर एक मस्त है मस्ती में रोमान्स का आलम छाया है।
इन बातो से दुर किसी ने एक अजीब सा माहौल बनाया है।
बात छिडी है किसानों की इसी ठिठुरन ने उनका संघर्ष दिखाया है।
अपने हक के लिये उसने अपना दमखम दिखलाया है।
अंजाम की परवाह नही उसको बस अपना काम निभाया है।
दुनिया की इस महफिल में ये कैसा अजब-गजब अभिनय आया है।
कोई खुशहाल मस्त है इस ठिठूरन में और किसी को इसने आजमाया है।
दस्तक हुई दिसम्बर की सर्दी का मौसम आया है।
साल का ये महीना एक प्यारी सी ठिठुरन लाया है।
---------- अनुज गुप्ता


