स्कूल के दिन
आज युही फिर स्कूल की ओर ऐसे ही कदम बड़ गये।
बचपन की किताब के पन्ने फिर एक बार जैसे खुल गये।।
किताब के पन्नों से निकला एक बड़ा यादों का कारवां।
और चेहरे पर मुस्कराहट के कई फुल युही खिल गये।।...1
युही बिना वजह हंसते खिलखिलाते कई चेहरे।
वो दो पल का झगड़ा फिर दोस्ती का फंसाने।।
वो लंच टाइम की मस्ती और वो छुटटी के बहाने।
जो थे कभी मेरा हिस्सा आज बिता हुआ किस्सा हो गये।।...2
दोस्त चढ़ाते थे और प्यार के फुल भी खिल जाते थे।
उस प्यार से न जाने क्यों फिर नजरे भी चुराते थे।।
दोस्त डाकिया बन उसको लव लैटर पहुंचाते थे।
फिर सब दोस्त उसे अपनी भाभी है कहकर बुलाते थे।।...3
जिंदगी में हजारों दोस्त आये और फिर चले गये।
लेकिन स्कूल वाले वो कमीने सदा के लिये दिल में बस गये।।
स्कूल में उनसे झगड़ा करते थे युही छोटी छोटी बातों पर।
आज उन दोस्तों को फिर ढंूढ़ने हम सोशल साइट पर गये।।...4
बचपन में बड़े होकर अपनी मर्जी की जिंदगी के लिये तरसते थे।
और बड़े होकर ये जाना की बचपन में ही मर्जी से हम जीते थे।।
वो वक्त कुछ खास था, अधूरे होमवर्क और टूटे खिलौने अच्छे थे।
आज के अधूरे एहसास और टूटे सपनों से अच्छा तो हम बच्चे थे।।...5
स्कूल भी मुझे देख मेरा चेहरा जैसे पहचान गया।
मेरे चेहरे में छूपे हुए गम को वो जैसे जान गया।।
बोला मुझसे तो तू परेशान था पहले बहुत।
अब ये बता तेरा जिंदगी का इम्तहान कैसा गया।।...6
स्कूल में बच्चों को देख फिर दिल ख्वाहिशों से फिर भर गया।
एक बार फिर बचपन गुजारने की दिल ये उम्मीद कर गया।।
गम और खुशी से भरा बीता कल युही मेरी आँखें नम कर गया।
स्कूल से विदा होते हुए युही इज्जत से दो पल मैं झुक गया।।...7
---------- अनुज गुप्ता


