माँ का दर्द

 

माँ मुझको आज भी वो बुलाता है, पर दो पल नही वो साथ बिताता है।

धुल चढ़ गयी है शायद रिश्ते को अब दुर वो हर-पल नजर यु आता है।...1

 

जिंदगी की भाग दौड में व्यस्त कही, लगता है मुझको भूल वो जाता है।

आँखों का तारा था कभी मेरी वो, अब आसमान को छूने जाता है।...2

 

रखती थी हर पल तुझपे नजर, जरूरतों का तेरी हर पल ख्याल आता है।

मेरी तो जरूरत बस तू है, अपनी जरूरतों में क्यों मुझको भुला वो जाता है।...3

 

बचपन में हाथ पकड चलना सिखाया है, हर-पल हर कदम साथ निभाया है।

चंद लम्हो की बची जिंदगी है, इसे पार लगाने का वक्त तेरा अब आया है।...4

 

खामोश तेरी जबान होती है, पर मुझको आँखों से सब समझ आ जाता है।

मैं भी खामोश हो जाती हु, समझ मेरी बातों को तू क्यों आँखों चुराता है।...5

 

जो आज गुज़रती है मुझपे,वो शायद कल तेरा वक्त भी आता है।

सीख आज उस पल को तु, कल तुझे मेरी जगह वक्त वही पहुचाता है।...6

 

माँ मुझको आज भी वो बुलाता है, पर दो पल नही वो साथ बिताता है।

धुल चढ़ गयी है शायद रिश्ते को,अब दुर वो हर-पल नजर यु आता है।...1

 

---------- अनुज गुप्ता

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