लक्ष्य
न लक्ष्य बदल एक राह पे चल , न छोड़ डगर ले आसान सफर।
मंजिल न मिलेगी आसान तुझको, डगर मुश्किलों से होगी भरी॥
तूफान का आना तो तय है और उसमे गिर जाना भी तय है।
गिर कर फिर तू उठ चल और पकड़ डगर अपनी मंजिल की॥..1
न हार तू मन से न थक तन से, तुझे दूर बहुत अभी जाना है।
जो तेरे मन ने ठाना है वो तुझे अब कर ही दिखना है॥
लोग हसंगे तुझ पर भी, कटाक्ष करेंगे वो तुझ पर भी।
न ध्यान तू उन को देना, बस तू अपनी मंजिल को तकना॥...2
एक छोटी सी उम्मीद खुद में जगा, दिल में तू एक तूफान उठा।
ईश्वर का फिर ध्यान लगा, कर्मठ बन फिर तू जुट जा॥
आज तुझे नहीं रुकना है, ना आज तुझे कही थकना है।
बस चलते ही चलते जाना हैं और अपने लक्ष्य को पाना हैं॥...3
एक पहचान बना इस दुनिया में, सम्मान मिले इस दुनिया से।
एक अहसास बना तू खुद में, सम्मान मिले अपनी नजरों से भी॥
बदल नजरिया अपना तू, बदल सोच दुनिया की तू।
कभी तेज कभी आहिस्ता बदल, न बदल लक्ष्य तू अपना कभी॥...4
मन में संघर्ष की चिंगारी जला, जज्बात को अपने तू शोला बना।
चल अब पथरीले रास्तों पर, अँधियारा तू अब दूर भगा॥
ग़रजे बादल और चमके बिजली, पर हर मुश्किल को तू अब धूल चटा।
कुछ मोड़ रहे गये मंजिल मे,इनको को भी तू अब पार लगा॥...5
न लक्ष्य बदल एक राह पे चल , न छोड़ डगर ले आसान सफर।
न लक्ष्य बदल एक राह पे चल , न छोड़ डगर ले आसान सफर ॥
---------- अनुज गुप्ता


