खुद से मुझको प्यार हुआ
खुद से खुद का मेल किया तो स्वयं से एक दीदार हुआ।
बहुत सब से प्रेम किया अब जा के खुद से प्रेम इस बार हुआ।
जख़्म मुझे बहुत मिले इस दुनिया से दर्द अब न बरदाश्त हुआ।
आज छोड़ सब दुनियादारी मैं खुद के जीने का आधार हुआ।।..1
न कोई अब दर्द सताता मुझे अपने गम से अब आजाद हुआ।
जख़्म ही जख़्म भरे थे दिल में अब मैं खुद उनका उपचार हुआ।
दिल से दिल लगाना छोड़ दिया अब आरज़ू नही दिलदार की।
खुद से है अब प्यार मुझे, मैं अपनी चाहत मे बेकरार हुआ।।...2
सोच मुक्त है अब दुनिया से मैं अब बेपरवाह और आजाद हुआ।
सामाजिक बन्धन अब टूट गये, दिल अब ये क्षितिज के पार हुआ।
बेचैन लहरें अब शान्त हो गई और समा ए सुकून इस बार हुआ।
बहुत हुए दौर परेशानियों के, मैं खुद ही अब नैया और पतवार हुआ।।...3
कभी झाँका नही मैने खुद में, मैं अब सुकून का समंदर हर बार हुआ।
खुशी के चार पल को जब सोचा, हर पल खुशियों की बहार हुआ।
आज मैं नही किसी का खिलौना, अपनी मर्जी का मैं हकदार हुआ।
अब ये जिंदगी सिर्फ मेरी अपनी है और मैं इसका खुद पहरेदार हुआ।।...4
खुद से खुद का मेल किया तो स्वयं से एक दीदार हुआ।
बहुत सब से प्रेम किया अब जा के खुद से प्रेम इस बार हुआ।
जख़्म मुझे बहुत मिले इस दुनिया से दर्द अब न बरदाश्त हुआ।
आज छोड़ सब दुनियादारी मैं खुद के जीने का आधार हुआ।।...1
---- अनुज गुप्ता


