बंदिश को पहचाना है

सोच रहा हूँ क्या मैने सच बंदिश को पहचाना है।

क्यों हर पल इसको मैने खुद के लिये खतरा जाना है।।

जीवन में हर पल हर घड़ी इसका साथ पुराना है।

हो बचपन, जवानी या घर या समाज, बंदिश का मुझसे याराना है।।...1

 

बचपन में बड़ो की रोकटोक दिल को खट जाती थी।

जिंदगी बहुत उस में खुद की बँधी नजर आती थी।।

बड़े होकर जाना वो बंदिश बड़ो की कुछ सिखलाती थी

सही राह जिंदगी के सफर में चुनने का सबब दे जाती थी।।...2

 

युवा के रूप में हर पल आजादी का ख्याल दिमाग में आता है।

घर और समाज के नियम की बेड़ियां में क्यों जकड़ा जाता है।

उन बेड़ियां ने जीवन में धैर्य और संयम महत्व समझाया।

जीवन के उतार चढ़ाव में इस कश्ती को पार लगाया है।।...3

 

कभी कभी समाज ने बंदिश के फायदे भी उठाये है।

झूठ को सही बनाने के लिये कई सच यु दबाये है।।

उन बंदिश के खिलाफ मिल कर आवाज हम उठायेगें।

सच और बंदिश की उस जंग में सच को हम जितायेगें।।...4

 

बंदिश का सागर है जिसमें है अच्छे और बुरे दो पैमाने।

देख के परखों किस बंदिश को छोडे और किसको पाले।।

जो जीवन को सुधारे उसे सहर्ष स्वीकार करें दिल से।

और बाकी सभी को हम अपनी जिंदगी से निकाले।।...5

 

सोच रहा हूँ क्या मैने सच बंदिश को पहचाना है।

क्यों हर पल इसको मैने खुद के लिये खतरा जाना है।।

जीवन में हर पल हर घड़ी इसका साथ पुराना है।

हो बचपन, जवानी या घर या समाज बंदिश का मुझसे याराना है।।...1

---- अनुज गुप्ता