आज फिर खुशियों को संजोते हैं
गम की झड़ी जिन्दगी मे लग गयी है तो क्या।
चल आज फिर से क्यो ना खुल के मुस्कुराते हैं।।
यारोंं की महफ़िल तेरे लिये फिर सजी है।
क्यों ना इस गम को भूल मस्ती में डुब जाते हैं।।...१
तेरे अपनो के पास तेरे लिए वक़्त नहीं है तो क्या।
हम तेरे अपनो से ज्यादा तुझे अपना बताते है।।
सारे यार मिल कर आज फिर तेरी खुशियों को संजोते हैं।
क्यों ना तुझे आज फिर खुशियों में डुबाते है।।...२
हसी खुशी के लम्हें जिंदगी में कुछ कम है क्या।
क्यों फिर एक छोटी से मुश्किल से यू बिखर जाते है।।
खूबसूरत यादो के कारवां से फिर आज गुजरते हैं।
क्यों ना इस मुश्किल दौर से अब फिर से उबर जाते है।।...३
वक़्त का तो शौक था हमेशा ही गुजर जाने का।
ये वक़्त भी गुजर जाएगा फिर क्यों हम यूं दुख मनाते हैं।।
क्यों अब कोसे उस गुज़रे हुए वक़्त को बेवजह हम युहीं।
आने वाले वक़्त को आज हम फिर सजाते है।।...४
वक़्त के इन अनमोल पलो को अब यादगार फिर बनाना है।
जिंदगी को फिर हसीन लम्हो से भरी माला से सजाते है।।
क्यों मेरी हर बात या हर किस्से में तेरा जिक्र आता है।
आज फिर तेरी और मेरी यारी से इस जमाने को जलाते है।।...५
गम की झड़ी जिन्दगी मे लग गयी है तो क्या।
चल आज फिर से क्यो ना खुल के मुस्कुराते हैं।।
यारोंं की महफ़िल तेरे लिये फिर सजी है।
क्यों ना इस गम को भूल मस्ती में डुब जाते हैं।।...१
---------- अनुज गुप्ता
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