आज दिल बेवजह युही कुछ मुस्कुराता है

आज दिल बेवजह युही कुछ मुस्कुराता है, ये ठंडा समा तेरे हाथों की चाय याद दिलाता है।

जो दूर है मेरे दिल से उनको पास बुलाता है, आज दिल बेवजह युही कुछ मुस्कुराता है...1

 

मुझको प्यारी है जो उनकी यादें मेरे पास, वो सभी धुनें दिल फिर आज गुनगुनाता है।

साथ बीते थे कुछ खट्टे मीठे पल अपने, वो सोचकर जिंदगी के लुत्फ उठाता है...2

 

सर्दी के मौसम का तुम्हें छेडना, हाथ तुम्हारा जब मेरे हाथों में आता था।

पलके झुका तेरा शर्माना फिर ठंड से सिहरा बदन तेरा मुझ में समाता था...3

 

वो बर्फ की चादर फैली थी दूर तलक, मैं तुझे देख तुझमे खो जाता था।

तभी बर्फ का गोला तेरे हाथों से निकला मुझे छू कर तेरे होने का अहसास करवाता था...4

 

जाड़े की सुबह वो कितनी हँसी होती थी,  फुल सा खिला चेहरा जब सामने आता था।

चाय का कप तेरे हाथ में और मेरे गाल पर तेरा प्यार का निशान छोडना बहुत सुहाता था...5

 

हमारे इश्क का अंदाज कुछ इतना तो खास है, तू मुझसे दुर रह कर भी हर पल मेरे पास है।

मंजिले फ़क़त अलग ही सही कुछ पल के लिये, ये पल गुजरे फिर तो जिंदगी भर का अपना साथ है...6

 

आज दिल बेवजह युही कुछ मुस्कुराता है, ये ठंडा समा तेरे हाथों की चाय याद दिलाता है।

जो दूर है मेरे दिल से उनको पास बुलाता है, आज दिल बेवजह युही कुछ मुस्कुराता है...1


---------- अनुज गुप्ता