शीर्षकः- ऐसा है मेरा दोस्त

मसुमियत से भरे बचपन के खेल में मिलता है ये रिश्ता,

आखिरी सांस तक मेरे साथ युही चलता चला जाता है।

जिंदगी भर मेरे साथ या मेरी याद में जगह बनाता है,

ऐसा है मेरा दोस्त जो जिंदगी भर साथ निभाता है।1

बात जब भी चलती है दोस्ती की तेरा ख्याल भी आता है,

महफिल सजती है दोस्तों की हर चेहरा तेरी याद दिलाता है।

वो गुज़रा था जो पल तेरे साथ, मस्ती भरे तराने ऐ दोस्त,

हर वो मंजर, वो तराना आज फिर आँखों में समाता है।1

मुहब्बत में भी एक दफा इन्सान को धोखा हो जाता है,

अपनी उम्मीद पुरी न हो तो रिश्ता बेवफा हो जाता है।

पर दोस्ती में हर गुज़रते पल से भरोसा और विश्वास आता है,

यहाँ उम्मीद दोस्त की पुरी हो पहले सिर्फ यही ख्याल आता है।2

वो राजदार हो जाता है मेरा बे-गरज हो के मुझसे,

हर राज को मेरे वो अपने सीने में छुपा जाता है।

मुहब्बत मेरी हो पर उसको अंजाम पर वो पहुचाता है,

मेरे मक़सद के लिये वो हर हद से युही गुजर जाता है।3

गलती पर मेरी मुझे वो सही रास्ता भी दिखाता है,

ना बात बने तो डाट या झगड़े से काम चलाता है।

गम के बादल छाये तो मेरे साथ मेरे पास बैठ कर,

चेहरे पे हँसी ला कर मेरे गम पर वो मरहम लगाता है।4

वो नाचता है मेरी खुशी में मेरे गम को खुद का बताता है,

उसे फर्क नही पड़ता है दुनिया मुझे क्या समझे।

उसके लिये सबसे पहले सिर्फ मेरा नाम आता है,

बात मेरी हो तो फिर दुनिया से भी लड़ जाता है5

मसुमियत से भरे बचपन के खेल में मिलता है ये रिश्ता,

आखिरी सांस तक मेरे साथ युही चलता चला जाता है।

जिंदगी भर मेरे साथ या मेरी याद में जगह बनाता है,

ऐसा है मेरा दोस्त जो जिंदगी भर साथ निभाता है।1

---------- अनुज गुप्ता