आधुनिकता के दौर में

 

आधुनिकता की चकाचौंध चारों ओर है, संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों का घटता दौर है।

शिष्टाचार और नैतिकता जीवन के जो आधार थे, आज का युवा इनसे क्यों लाचार है।।

दोष सबने रख दिया युवा को कलंक दिया, क्या सच में सिर्फ युवा इसके जिम्मेदार है।

माना गलत राह पर चल रहा है युवा, कुछ हद तक समाज और परिवार भी हिस्सेदार है।...1

 

जब दिमाग उसका बिलकुल शुन्य था, वाल्यकाल उसका कुछ भी गढ़ने को तैयार था।

वो दादा दादी की कहानियों का सार था जो देता बच्चों को शिष्टाचार वो प्यार था।।

पुस्तकों की भीड़ में नैतिक शिक्षा ही सार थ, आज वो सब पीछे क्यों युही छुट रहा।

आधुनिकता की रेस तो याद रह गयी है, पर इंसान क्यों अब इंसान बनना बस भूल रहा।...2

 

दुनिया उसकी कंप्यूटर, विडियो गेम्स, कौमिक्स और फिल्मी गानों से पट गयी।

बचपन से जेहन में एक जंग छिड़ गय,स्त्री पुरूष के बीच फर्क की नींव पड़ गयी।।

दोनों लगे हैं एक दूजे को झुकाने में, भावनाओं की तो इसमें जैसे चिता ही जल रही।

अहम दिमाग में सब के घर बना रहा, और मतलब साधने में यु जिंदगी गुजर रही।।...3

 

भगत सिंह, स्वामी विवेकानंद के बीते जमाने हुए, नये दौर में पैसा और पावर फंसाने हुए।

न्यूज चैनल भी एक तरफा पहलु दिखा रहा असली समाज का चेहरा तो वो छुपा गये।।

जो कमी रह गयी थी नैतिकता के खात्में में, उस कमी को सोशल साइटस पुरा कर गये।

बाकी सब रिश्तों को सब भूल ही गये, मतलब का रिश्ते बस अब यहाँ बाकी रह गये।।...4

 

माता पिता दोनों एक रेस में हिस्सा हो गये, कमाने के लिये बच्चों से बेफिक्र हो गये।

बच्चे भी अकेलेपन को भरने के लिये खुद को टीवी और कम्प्यूटर का हिस्सा कर गये।।

जो समय सबका एक साथ गुजरना था, सब अपने खुद में खुद को व्यस्त कर गये।

सबका एक अजब दायरा बन गया एक घर में, एक दूसरे को खुद से बेदखल कर गये।।...5

 

आधुनिकता की चकाचौंध चारों ओर है, संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों का घटता दौर है।

शिष्टाचार और नैतिकता जीवन के जो आधार थे, आज का युवा इनसे क्यों लाचार हैं।।

दोष सबने रख दिया युवा को कलंक दिया, क्या सच में सिर्फ युवा इसके जिम्मेदार हैं।

माना गलत राह पर चल रहा है युवा, कुछ हद तक समाज और परिवार भी हिस्सेदार हैं।...1

---------- अनुज गुप्ता